Posts

भरी सभा में सुधारों की, बात करते हैं।

नये समय की नयी चुनौती

न था कोई कुसूर मगर, गुनहगार हो गए।

मिटने वाला मैं नाम नहीं…

वो तो नफरतों का शोरगुल, जुटाने पे लगा है

ना थकें कभी पैर

जिधर देखूं स्वार्थपरायण संचार था।

श्री कृष्ण ने साफ कहा हैं

अरविंद कुमार झा उर्फ राजू झा जी के मां की बरखी में सामिल हुआ।

मित्रता कैसी होनी चाहिए।

K. U. V. Puranankar-Balha