टस से मस नहीं होते

हक़ीक़त के ख्वाब सपने नहीं होते, कुछ रिश्ते अपने नहीं होते! बिना फल लगे पेड़ नीचे नही झुकते! लाख कर लो जतन, दर्द मे आंसू नही रुकते! रख दो चाहे कलेजा निकाल कर, टस से मश नहीं होते, प्रेम के बीज मरुथल मे नही बोते! कुछ रिश्ते अपने नहीं होते। जीवन कुर्बान कर दो, चाहे उनके आन पर, इतरायेंगे ही वो अपने अभिमान पर, सब अजमा कर देखा है, उनके हाथ मे नफरत की रेखा है! पेड़ कितने बड़े हो अशमान नही छूते! कुछ रिश्ते अपने नहीं होते। दूर से भी गैरों के सितम ढाते है, मोहब्बत के करम कहाँ मिलते है मिले जब भी हम सराफत से, फ़टे दिल कहाँ सिलते है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिनांक:- 28/01/2026 को बलहा घाट - गोढ़ियारी घाट पुल निर्माण : जनआंदोलन, जनअनुशंसा एवं संघर्ष की ऐतिहासिक पहल

दिनांक:-4-5/01/2026 को पुरानानकर बलहा घाट – गोढ़ियारी घाट पुल निर्माण हेतु संयुक्त आभार एवं पुनः आग्रह

(chronological biography) सर्वसाधारण बिहार सरकार भूमि से अतिक्रमण हटाने के न्याय के लिए संघर्ष : एक प्रशासनिक यात्रा