दुनियां की नजर मुझ पर मां

 

दुनियां की नज़र मुझ पर माँ

कहीं खो ना जांउ सन्नाटे में।।

हालातों से डर जाता हूँ मैं....

अंगार की तरह क्यों चूभता माँ

वे लोग क्यों बदल जातें हैं।।

छोटे से सपने मेरे माँ

खूशियों से ग़ले लग़ाने की।।

अब उठती हैं महक माँ

सुखे ग़ुलाबो के अफ़साने की।।

बहुत हुआ देवता क्रूर नहीं माँ

आओ "आदित्य" मंज़िल दूर नहीं।।

                          ::- आदित्य आर्य सिन्हा

                                   (रचनाकार)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दिनांक:- 28/01/2026 को बलहा घाट - गोढ़ियारी घाट पुल निर्माण : जनआंदोलन, जनअनुशंसा एवं संघर्ष की ऐतिहासिक पहल

दिनांक:-4-5/01/2026 को पुरानानकर बलहा घाट – गोढ़ियारी घाट पुल निर्माण हेतु संयुक्त आभार एवं पुनः आग्रह

(chronological biography) सर्वसाधारण बिहार सरकार भूमि से अतिक्रमण हटाने के न्याय के लिए संघर्ष : एक प्रशासनिक यात्रा